केदारनाथ सिंह की रचनाओं में आंचलिक एवं ग्रामीण भाषा का चित्रण

Authors

  • डॉ. मालती साहू

Keywords:

केदारनाथ सिंह, आंचलिक भाषा, ग्रामीण भाषा, लोकभाषा, भोजपुरी, काव्यभाषा, ग्रामीण जीवन, देशज शब्दावली।

Abstract

समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि केदारनाथ सिंह की रचनात्मकता का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनकी विशिष्ट काव्यभाषा है। उनकी कविता की भाषा न तो केवल साहित्यिक हिंदी तक सीमित है और न ही वह लोकभाषाओं से अलग किसी कृत्रिम अथवा अभिजात भाषा का रूप ग्रहण करती है। पूर्वांचल की मिट्टी, ग्रामीण जीवन, लोक-संस्कृति, खेती-किसानी, पारिवारिक संबंधों और सामान्य जनजीवन से गहरे जुड़े होने के कारण उनकी काव्यभाषा में आंचलिक एवं ग्रामीण संवेदना स्वाभाविक रूप सेदेखनेकोमिलतीहै। पूर्वांचलकी संस्कारों से प्रभावित उनकी अभिव्यक्ति में बोलचाल के शब्द, देशज प्रयोग, लोक-स्मृतियाँ तथा गांवजवारकेजीवन से जुड़े बिंब सहज रूप में सम्मोहितहोते हैं।केदारनाथ सिंह की विशेषता यह है कि वे सरल जीवन में प्रयोगहोनेवाले शब्दों और वस्तुओं को भी गहरे भावपूर्ण अर्थ प्रदान करते हैं। केदारनाथके कविताओं में रोटी, पानी, पेड़, मिट्टी, खेत, पक्षी, घर आदि जैसे शब्द केवल वस्तुओं का परिचयनहींकरवाते, अपितु इनके माध्यम से श्रम, भूख, स्मृति, प्रकृति, मानवीय संबंध और सामाजिक जीवन जैसे व्यापक विषय प्रकट होते हैं।

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Published

2015-09-13

How to Cite

डॉ. मालती साहू. (2015). केदारनाथ सिंह की रचनाओं में आंचलिक एवं ग्रामीण भाषा का चित्रण. Eduzone: International Peer Reviewed/Refereed Multidisciplinary Journal, 4(2), 47–58. Retrieved from https://eduzonejournal.com/index.php/eiprmj/article/view/971